✍️ रिपोर्ट – कृष्ण कुमार | न्यूज़ डेस्क
बिहार में कृषि को नई दिशा
बिहार हमेशा से कृषि प्रधान राज्य रहा है। यहाँ की बड़ी आबादी खेती और उससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर करती है। लेकिन लंबे समय से किसान कम मुनाफे और मंडियों की अव्यवस्था से परेशान थे। इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किसानों को एक बड़ा तोहफा दिया है। उन्होंने घोषणा की है कि राज्य के 534 प्रखंडों में आधुनिक सब्जी केंद्र (Modern Vegetable Centers) स्थापित किए जाएंगे।
इस योजना से न केवल सब्जी उत्पादकों को सीधा लाभ मिलेगा, बल्कि उपभोक्ताओं को भी ताज़ी और गुणवत्तापूर्ण सब्जियाँ सही दाम पर मिलेंगी।
क्या होंगे आधुनिक सब्जी केंद्र?
आधुनिक सब्जी केंद्र ऐसे विशेष स्थान होंगे जहाँ किसानों को खेती से जुड़ी हर सुविधा एक ही छत के नीचे उपलब्ध होगी। इसमें शामिल होंगे:
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उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराना
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आधुनिक खेती तकनीक पर प्रशिक्षण
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कोल्ड स्टोरेज सुविधा ताकि सब्जियाँ लंबे समय तक सुरक्षित रहें
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सीधे मंडी से जुड़ाव ताकि किसानों को उचित मूल्य मिले
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ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म से जोड़ने की योजना
किसानों के लिए बड़ा फायदा
सबसे बड़ी समस्या यह रही है कि किसान मेहनत से सब्जी तो उगा लेते हैं, लेकिन मंडियों में उचित दाम नहीं मिल पाता। कई बार बिचौलियों के कारण उन्हें घाटे में बेचना पड़ता है।
अब आधुनिक सब्जी केंद्रों के माध्यम से:
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किसान सीधे मंडी या थोक खरीदार से जुड़ेंगे।
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कोल्ड स्टोरेज के कारण सब्जियों का नुकसान कम होगा।
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पैकेजिंग और ब्रांडिंग से बिहार की सब्जियाँ अन्य राज्यों में भी जाएँगी।
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किसानों की आमदनी में 20-30% तक की बढ़ोतरी संभव है।
बिहार सरकार का विज़न 2025
नीतीश कुमार की सरकार पहले ही 2025 तक बिहार को विकसित राज्य की श्रेणी में लाने का लक्ष्य तय कर चुकी है। कृषि इस रोडमैप का सबसे अहम हिस्सा है।
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534 प्रखंडों में केंद्र बनाकर हर जिले को कवर किया जाएगा।
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महिला किसान समूहों को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा।
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बिहार की सब्ज़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की तैयारी होगी।
किसानों की राय
गया जिले के किसान सुरेश यादव कहते हैं –
"अभी तक हमें सब्जी बेचने में सबसे बड़ी दिक्कत यह होती थी कि सही दाम नहीं मिलता। अगर यह केंद्र बनेंगे और हमें सीधे मंडी तक पहुँच मिलेगी तो यह हमारी ज़िंदगी बदल देगा।"
दरभंगा की महिला किसान अनीता देवी कहती हैं –
"महिलाओं को भी खेती में आगे आने का मौका मिलेगा। अगर हमें ट्रेनिंग और बाजार दोनों मिल जाएँ तो हम आत्मनिर्भर बन सकते हैं।"
युवाओं के लिए नए अवसर
आधुनिक सब्जी केंद्र सिर्फ किसानों के लिए ही नहीं बल्कि युवाओं के लिए भी नए रोजगार के अवसर लेकर आएंगे।
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इन केंद्रों में टेक्नीशियन, सुपरवाइज़र और मार्केटिंग एक्सपर्ट की ज़रूरत होगी।
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स्टार्टअप्स और एग्री-टेक कंपनियाँ भी यहाँ निवेश कर सकती हैं।
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ई-कॉमर्स के माध्यम से किसान सीधे ग्राहकों तक पहुँच सकेंगे।
आर्थिक और सामाजिक असर
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ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी – गाँवों में किसानों की आय बढ़ने से खपत भी बढ़ेगी।
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माइग्रेशन रुकेगा – बेहतर आमदनी के कारण किसानों को बाहर रोज़गार की तलाश में नहीं जाना पड़ेगा।
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महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी – स्वयं सहायता समूहों को इस योजना में शामिल करने से महिलाएँ भी आर्थिक रूप से सशक्त होंगी।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
विपक्षी दलों ने इस योजना का स्वागत तो किया है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठाया है कि पहले की कई घोषणाएँ धरातल पर पूरी नहीं हो पाईं। उनका कहना है कि सरकार को केवल घोषणा नहीं बल्कि समय पर क्रियान्वयन भी सुनिश्चित करना चाहिए।
भविष्य की संभावनाएँ
अगर यह योजना सफल रही तो बिहार देशभर में सब्जी उत्पादन का हब बन सकता है। अभी पंजाब, हरियाणा और महाराष्ट्र सब्जी व फल उत्पादन में आगे हैं। बिहार की उपजाऊ मिट्टी और मेहनती किसान इस योजना के जरिये न सिर्फ इन राज्यों को चुनौती देंगे बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बना सकते हैं।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इस पहल से किसानों को नई ऊर्जा मिली है। 534 प्रखंडों में आधुनिक सब्जी केंद्र बनने से कृषि क्षेत्र को एक नई दिशा मिलेगी। किसानों की आमदनी बढ़ेगी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और बिहार देशभर में सब्जी उत्पादन का केंद्र बन सकता है।
यह योजना सिर्फ एक घोषणा नहीं बल्कि बिहार की ग्रामीण तस्वीर बदलने की शुरुआत है।



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