मधेपुरा विधानसभा 73 में महाभारत: आरजेडी, जेडीयू, जन सुराज और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच चार कोनों की लड़ाई
बिहार की राजनीति में मधेपुरा का नाम सुनते ही सबसे पहले दिमाग में आता है – राजनीतिक गर्मी, जातीय समीकरण और जनता की जागरूकता।
अबकी बार 73 नंबर मधेपुरा विधानसभा सीट पर वही तस्वीर दिख रही है, जहाँ मुकाबला तिकोना नहीं बल्कि चौकोना हो गया है।
यहाँ मैदान में हैं:
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आरजेडी से शिक्षा मंत्री डॉ. चंद्रशेखर यादव,
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जेडीयू से समाजसेवी कविता साहा,
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जन सुराज पार्टी से युवा चेहरा शशि कुमार,
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और निर्दलीय उम्मीदवार पर्णव प्रकाश।
चारों उम्मीदवारों ने अपने-अपने तरीके से जनता तक पहुँच बनाई है, और अब यह सीट राज्य की सबसे चर्चित विधानसभा बन चुकी है।
RJD का दांव: चंद्रशेखर यादव पर पूरा भरोसा
आरजेडी ने फिर से भरोसा जताया है अपने पुराने योद्धा डॉ. चंद्रशेखर यादव पर।
शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने पूरे प्रदेश में अपनी अलग पहचान बनाई है।
उनकी कार्यशैली तेजस्वी यादव के करीबी नेता के रूप में मानी जाती है, और यही वजह है कि पार्टी ने मधेपुरा की कमान फिर उन्हीं को सौंपी है।
नामांकन के दिन हजारों की भीड़ और युवाओं की मौजूदगी ने आरजेडी खेमे का जोश बढ़ा दिया।
चंद्रशेखर यादव ने अपने भाषण में कहा –
“यह चुनाव जनता की आवाज़ का चुनाव है, मधेपुरा की प्रतिष्ठा का सवाल है।”
हालांकि, कुछ स्थानीय नेताओं में टिकट वितरण को लेकर असंतोष भी देखा गया, लेकिन पार्टी आलाकमान ने साफ कर दिया है कि इस बार काम करने वालों को ही इनाम मिलेगा।
JDU का नया चेहरा: कविता साहा पर भरोसा
नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने इस बार नया चेहरा उतारा है – स्मृति कविता साहा, जो मधेपुरा की प्रसिद्ध समाजसेवी और शिक्षिका हैं।
कविता साहा का लक्ष्य है महिला मतदाताओं और मध्यम वर्गीय परिवारों तक सीधा संपर्क बनाना।
उनका नारा है –
“सुरक्षित महिलाएं, शिक्षित समाज – यही है नया मधेपुरा।”
जेडीयू का संगठन इस बार पूरी तरह कविता साहा के साथ खड़ा दिख रहा है।
उनकी सभाओं में बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा छात्राएं जुड़ रही हैं।
विशेष बात यह है कि वे सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव हैं, जिससे उनकी पहचान युवाओं में तेजी से बढ़ रही है।
निर्दलीय उम्मीदवार: पर्णव प्रकाश की शांत लहर
जब बड़े दलों की राजनीति में नाराज़गी बढ़ती है, तो जनता का ध्यान स्वतंत्र चेहरों पर जाता है।
ऐसा ही हो रहा है मधेपुरा में, जहाँ पर्णव प्रकाश निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं।
पर्णव प्रकाश का चेहरा नया है, लेकिन उनका काम बोलता है।
वे स्थानीय मुद्दों – जैसे सड़क, शिक्षा, और बेरोज़गारी – को लेकर लगातार सक्रिय रहे हैं।
उनका नारा –
“अबकी बार जनता की सरकार।”
युवाओं के बीच पर्णव प्रकाश की छवि एक ईमानदार और ग्राउंड-लेवल उम्मीदवार की बन रही है।
हालांकि, संगठन की कमी उनके लिए चुनौती है, लेकिन जनता में भरोसे की लहर उनके पक्ष में दिखती है।
जन सुराज पार्टी का प्रवेश: शशि कुमार ने बदल दिया खेल
इस बार मधेपुरा में एक नया चेहरा उभरा है – शशि कुमार, जिन्होंने जन सुराज पार्टी से चुनावी मैदान संभाला है।
शशि कुमार पेशे से शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो लंबे समय से स्थानीय मुद्दों पर आवाज उठाते रहे हैं।
उनकी सभाएं छोटी होती हैं, लेकिन जोश बड़ा होता है।
जन सुराज के संयोजक प्रशांत किशोर (PK) के साथ जुड़े इस अभियान का मकसद है “नया बिहार – नई सोच”।
शशि कुमार कहते हैं –
“मधेपुरा अब बदलाव चाहता है। यहाँ अब जाति नहीं, विकास पर वोट होगा।”
उनकी साफ छवि और ईमानदार अपील ने कई नए मतदाताओं का ध्यान खींचा है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि शशि कुमार का जनाधार भले छोटा दिखे, लेकिन उनका प्रभाव निर्णायक साबित हो सकता है।
चुनावी समीकरण और मतदाताओं का गणित
मधेपुरा विधानसभा में जातीय समीकरण हमेशा से चुनाव का केंद्र रहा है।
इस बार हालांकि युवा और महिला मतदाता दोनों ही ‘निर्णायक फैक्टर’ बनते दिख रहे हैं।
| समुदाय / वर्ग | वोट प्रतिशत | झुकाव |
|---|---|---|
| यादव | 32% | परंपरागत रूप से RJD |
| मुस्लिम | 18% | RJD और जन सुराज में विभाजित |
| महिला मतदाता | 27% | JDU और कविता साहा की ओर झुकाव |
| युवा मतदाता | 15% | पर्णव प्रकाश और शशि कुमार |
| कोइरी / अति पिछड़ा वर्ग | 8% | NDA और स्वतंत्र उम्मीदवार |
जनता की राय: “इस बार सोच-समझकर वोट देंगे”
स्थानीय स्तर पर जनता का मूड बदला हुआ दिख रहा है।
एक दुकानदार ने कहा –
“पहले लोग जाति देखकर वोट देते थे, अब काम देखकर देंगे।”
युवाओं में रोजगार, शिक्षा और भ्रष्टाचार मुख्य मुद्दे हैं।
महिलाएं सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सबसे ज्यादा सजग हैं।
इसका फायदा कविता साहा और शशि कुमार जैसे उम्मीदवारों को मिल सकता है।
ग्राउंड रिपोर्ट: सभाओं में दिख रही है असली तस्वीर
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आरजेडी की सभाओं में भीड़ तो बड़ी है, पर उत्साह उतना नहीं जितना 2020 में था।
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जेडीयू की सभाओं में महिलाएं बढ़-चढ़कर आ रही हैं।
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जन सुराज पार्टी का ग्राउंड नेटवर्क धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है।
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और पर्णव प्रकाश का प्रचार घर-घर संपर्क और “एक-एक वोट” रणनीति पर टिका है।
निष्कर्ष: मधेपुरा में मुकाबला अब चार कोनों का
मधेपुरा विधानसभा 73 की यह लड़ाई अब सिर्फ सीट की नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेगी।
आरजेडी के पास अनुभव और वोट बैंक है, जेडीयू के पास महिला सशक्तिकरण का एजेंडा, जन सुराज के पास नई सोच, और निर्दलीय उम्मीदवारों के पास जनता का भरोसा।
अंतिम नतीजा चाहे जो भी हो, इतना तय है कि मधेपुरा इस बार बिहार की राजनीति की सबसे दिलचस्प और निर्णायक सीट बनने जा रही है।
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