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बुधवार, 22 अक्टूबर 2025

दिल्ली में दर्दनाक घटना: पिता के ड्राइवर ने 5 साल के मासूम का अपहरण कर की हत्या, बदले की थी साजिश!

 दिल्ली में मासूम की हत्या से हिला देश – पिता के ड्राइवर ने बदले की भावना में किया खौफनाक अपराध

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2025 | 

✍️रिपोर्ट: कृष्ण कुमार | TezBreaking24 |

नई दिल्ली के नरेला इलाके में सोमवार शाम एक ऐसी वारदात हुई जिसने हर माता-पिता को सन्न कर दिया।
यह घटना न सिर्फ दिल दहला देने वाली है बल्कि समाज के उस काले पक्ष को भी उजागर करती है, जहां विश्वास और भरोसा ही सबसे बड़ा खतरा बन जाता है।

घटना का पूरा मामला

जानकारी के अनुसार, नरेला के रहने वाले एक कारोबारी का 5 साल का बेटा रोज की तरह शाम को मोहल्ले में खेल रहा था। परिवार ने हमेशा की तरह निश्चिंत होकर बच्चे को बाहर खेलने दिया, लेकिन कुछ ही देर में वह लापता हो गया।
परिवार ने आसपास तलाश की, पर कोई सुराग नहीं मिला। रात गहराने लगी और बेचैनी बढ़ती गई। इसी बीच बच्चे के पिता के ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में काम करने वाले ड्राइवर का मोबाइल भी बंद मिला।

थोड़ी देर बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। स्थानीय पुलिस ने जांच शुरू की और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। इन्हीं फुटेज में सामने आया कि बच्चे को आखिरी बार उसी ड्राइवर के साथ जाते हुए देखा गया था।

पुलिस की जांच और खुलासा

पुलिस ने तुरंत टीम गठित कर ड्राइवर की तलाश शुरू की। जब टीम उसके किराए के कमरे पर पहुंची, तो दरवाजा बंद था। खिड़की तोड़कर अंदर पहुंचने पर पुलिसकर्मियों के सामने जो दृश्य था, वह किसी भी दिल को दहला सकता था।
कमरे के फर्श पर खून के धब्बे थे और पास ही बच्चे का शरीर पड़ा था। बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

जांच में सामने आया कि आरोपी ड्राइवर नीतू (26 वर्ष) ने बच्चे की हत्या चाकू और ईंट से हमला कर की थी।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती जांच में बदले की भावना का एंगल सामने आया है।

बदले की भावना में की हत्या

बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले आरोपी ड्राइवर का अपने मालिक के एक अन्य कर्मचारी से झगड़ा हुआ था। इस झगड़े के बाद बच्चे के पिता ने नीतू को डांटा था।
यह बात उसके अहम को लग गई और उसने अपने मालिक को सबक सिखाने की ठान ली। इसी के तहत उसने मालिक के सबसे प्यारे बेटे को निशाना बनाया।

जांचकर्ताओं के अनुसार, नीतू ने बच्चे को मिठाई खिलाने के बहाने अपने साथ ले गया और उसके बाद बेरहमी से उसकी हत्या कर दी।
हत्या के बाद आरोपी फरार है, पुलिस ने उसके खिलाफ अपहरण, हत्या और सबूत मिटाने के तहत मामला दर्ज किया है।

पुलिस की कार्रवाई और जांच की दिशा

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस केस को प्राथमिकता पर लिया है। कई टीमों को उत्तर प्रदेश, हरियाणा और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में भेजा गया है, जहां आरोपी के छिपे होने की आशंका है।
पुलिस ने नीतू के परिवार और दोस्तों से पूछताछ शुरू कर दी है। मोबाइल लोकेशन, बैंक ट्रांजैक्शन और सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपी के मूवमेंट को ट्रैक किया जा रहा है।

डीसीपी (नॉर्थ) ने मीडिया को बताया कि,

“यह बेहद संवेदनशील मामला है। आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर सख्त से सख्त सजा दिलाई जाएगी। हमने बच्चे के परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।”

परिवार का रो-रो कर बुरा हाल

घर में मातम पसरा है। बच्चे की मां की हालत नाजुक बताई जा रही है। परिवार के लोग बार-बार यही सवाल पूछ रहे हैं —

“जिस इंसान पर हमने भरोसा किया, उसने ही हमारे बच्चे की जान ले ली।”

पड़ोसी और स्थानीय लोग भी गुस्से में हैं। उन्होंने पुलिस से आरोपी को जल्द पकड़ने और फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामला चलाने की मांग की है।

सुरक्षा पर उठे सवाल

यह घटना उस गहरी समस्या की ओर इशारा करती है जो महानगरों में तेजी से बढ़ रही है — विश्वास का दुरुपयोग
घर, व्यापार या बच्चों की सुरक्षा के लिए रखे गए कर्मचारी, ड्राइवर, या सहायकों का वेरिफिकेशन अक्सर औपचारिकता भर रह जाता है।
नरेला की यह वारदात दिखाती है कि सिर्फ पहचान पत्र या अनुभव के आधार पर किसी को नियुक्त करना कितना बड़ा जोखिम हो सकता है।

विशेषज्ञों की राय

क्रिमिनल साइकोलॉजिस्ट डॉ. अनीता भारद्वाज का कहना है,

“ऐसे अपराधों में व्यक्तिगत अपमान या ईर्ष्या अहम भूमिका निभाती है। व्यक्ति जब खुद को अपमानित महसूस करता है, तो वह किसी निर्दोष को निशाना बनाकर बदला लेने की कोशिश करता है।”

सुरक्षा विशेषज्ञों का सुझाव है कि हर नियोक्ता को अपने कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन जरूर कराना चाहिए। साथ ही, बच्चों को भी सिखाना चाहिए कि किसी के साथ बिना बताए न जाएं, चाहे वह परिचित ही क्यों न हो।

समाज पर असर और संवेदनशीलता की जरूरत

बच्चों से जुड़ी ऐसी घटनाएं केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं होतीं, बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा प्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
शहरों में बढ़ती व्यस्तता और भरोसे की कमी के बीच माता-पिता के लिए बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है।

यह समय है जब परिवारों को सतर्कता बढ़ाने और बच्चों को सावधानी सिखाने की जरूरत है।
साथ ही, प्रशासन को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कर्मचारी वेरिफिकेशन सिर्फ कागजी प्रक्रिया न रह जाए।

सोशल मीडिया पर गुस्सा और शोक की लहर

जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर लोगों ने गहरी संवेदना जताई और आरोपी को जल्द पकड़ने की मांग की।
#JusticeForDelhiBoy और #NarelaMurder जैसे हैशटैग ट्विटर (अब X) पर ट्रेंड कर रहे हैं।

कई यूज़र्स ने दिल्ली पुलिस से अपील की कि इस मामले में फास्ट ट्रैक कार्रवाई की जाए और ऐसे अपराधियों को उदाहरण के तौर पर कठोर सजा दी जाए।

सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया

दिल्ली सरकार ने इस घटना पर दुख जताते हुए बच्चे के परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
साथ ही गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस को रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं ताकि मामले की निगरानी सीधे वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जा सके।


निष्कर्ष

नरेला की यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि हमारे समाज की उस खामोश विडंबना को उजागर करती है —
जहां विश्वास, रोजगार और मानवता के बीच सीमाएं धुंधली होती जा रही हैं।

5 साल के मासूम की हत्या ने यह सिखाया है कि “भरोसा करने से पहले जांच जरूरी है।”
यह केवल पुलिस या प्रशासन की नहीं, बल्कि हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम अपने आस-पास की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करें, ताकि कोई और बच्चा नरेला के इस मासूम की तरह अपनी जान न गंवाए।


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