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गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025

बिहार के चार मोस्ट वांटेड गैंगस्टर रोहिणी में ढेर | दिल्ली क्राइम ब्रांच और बिहार पुलिस का संयुक्त ऑपरेशन ||

 दिल्ली में बड़ा एनकाउंटर: बिहार के चार मोस्ट वांटेड अपराधी रोहिणी में ढेर

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2025:

✍️रिपोर्ट: कृष्ण कुमार | TezBreaking24 |

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच और बिहार पुलिस की संयुक्त टीम ने बुधवार देर रात एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। राजधानी के रोहिणी इलाके में हुई मुठभेड़ में बिहार के चार मोस्ट वांटेड अपराधी मारे गए। यह मुठभेड़ रात करीब 2:20 बजे बहादुर शाह मार्ग के पास हुई, जब पुलिस ने इन अपराधियों को घेरने की कोशिश की।

कैसे हुआ एनकाउंटर

सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली और बिहार पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि बिहार के कुख्यात अपराधी गिरोह के चार सदस्य दिल्ली में छिपे हुए हैं। वे हाल ही में बिहार से भागकर यहां पहुंचे थे और किसी बड़े आपराधिक वारदात की योजना बना रहे थे।
पुलिस की संयुक्त टीम ने इलाके में घेराबंदी की और संदिग्ध वाहन को रोकने का प्रयास किया। लेकिन वाहन में बैठे अपराधियों ने पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं। इस दौरान चारों अपराधी गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना के बाद उन्हें तुरंत डॉ. बीएसए अस्पताल, रोहिणी ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मारे गए अपराधियों की पहचान

पुलिस ने चारों मृत अपराधियों की पहचान इस प्रकार की है:

  1. रंजन पाठक (25) – सीतामढ़ी का निवासी, गिरोह का मुखिया माना जाता था।

  2. बिमलेश महतो (25) – हथियार सप्लायर और गिरोह का फील्ड ऑपरेटर।

  3. मनीष पाठक (33) – कई हत्या और रंगदारी मामलों में वांछित।

  4. अमन ठाकुर (21) – दिल्ली में छिपने और नेटवर्क फैलाने का काम कर रहा था।

इन चारों पर बिहार पुलिस ने हत्या, रंगदारी, और हथियार तस्करी जैसे कई गंभीर मामलों में इनाम घोषित किया था।

क्राइम हिस्ट्री और नेटवर्क

जांच में सामने आया है कि यह गिरोह पिछले कई महीनों से बिहार के उत्तरी जिलों में सक्रिय था। इन पर कई हत्याओं, लूट और फिरौती के केस दर्ज हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, रंजन पाठक गैंग ने 2024 में सीतामढ़ी में व्यापारी की हत्या की थी और इसके बाद से ये सभी फरार थे।
दिल्ली में इनका ठिकाना एक पुरानी बिल्डिंग में था जहां से ये बिहार के संपर्कों से ऑनलाइन रंगदारी वसूली का काम कर रहे थे।

संयुक्त ऑपरेशन का पूरा प्लान

दिल्ली क्राइम ब्रांच और बिहार पुलिस ने करीब दो सप्ताह तक ज्वाइंट सर्विलांस ऑपरेशन चलाया था।
मोबाइल लोकेशन, CCTV फुटेज और मुखबिर की जानकारी के आधार पर अपराधियों की लोकेशन तय की गई।
पुलिस ने बुधवार देर रात ऑपरेशन शुरू किया और जैसे ही वाहन को रोका गया, अपराधियों ने गोली चलानी शुरू कर दी।

दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया –

“हमने उन्हें आत्मसमर्पण का मौका दिया, लेकिन उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में चारों को न्यूट्रलाइज किया गया।”

मौके से बरामद हथियार

पुलिस ने मौके से 3 पिस्टल, 2 देशी कट्टे, 40 जिंदा कारतूस और एक बोलेरो कार जब्त की है।
कार की नंबर प्लेट फर्जी पाई गई। फॉरेंसिक टीम ने मौके से सारे साक्ष्य एकत्र कर लिए हैं।

अस्पताल और पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया

घटना के बाद सभी अपराधियों को डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर हॉस्पिटल, रोहिणी में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद चारों को मृत घोषित किया।
मृतकों के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। परिजनों को सूचना दे दी गई है और बिहार पुलिस ने केस फाइल अपने कब्जे में ले ली है।

आगे की जांच

पुलिस अब गिरोह के बाकी सदस्यों और दिल्ली में मिले संपर्कों की तलाश कर रही है।
फोन रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन और कॉल डिटेल्स की जांच की जा रही है।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई अंतरराज्यीय अपराध नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम है।

राजनीतिक हलचल और सुरक्षा अलर्ट

घटना के बाद बिहार और दिल्ली दोनों जगहों पर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
चुनाव के समय अपराधियों की सक्रियता को देखते हुए यह मुठभेड़ कानून-व्यवस्था के लिए राहत की खबर मानी जा रही है।
पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई से अपराधियों को स्पष्ट संदेश गया है कि कानून से बच निकलना नामुमकिन है।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

रोहिणी इलाके के स्थानीय निवासियों ने बताया कि उन्होंने देर रात गोलियों की आवाजें सुनीं और तुरंत पुलिस ने इलाके को घेर लिया।
कई लोगों ने इसे “दिल्ली पुलिस की बड़ी सफलता” बताया। एक निवासी ने कहा —

“रात में डर जरूर लगा, लेकिन सुबह जब पता चला कि इतने खतरनाक अपराधी मारे गए हैं तो राहत मिली।”

निष्कर्ष

दिल्ली और बिहार पुलिस की इस संयुक्त कार्रवाई ने साबित कर दिया कि अपराध किसी भी राज्य की सीमा में सुरक्षित नहीं रह सकता।
रंजन पाठक गिरोह का खात्मा पुलिस के लिए बड़ी उपलब्धि है और यह संदेश देता है कि अपराधियों के लिए अब दिल्ली भी सुरक्षित ठिकाना नहीं।


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