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बुधवार, 22 अक्टूबर 2025

BJP–JDU का चुनावी ऐलान: पहले चरण में 16 मंत्रियों की एंट्री, मिशन बिहार की शुरुआत

 पटना से मिशन बिहार 2025 की शुरुआत

पटना, 22 अक्टूबर 2025 | 

✍️रिपोर्ट: कृष्ण कुमार | TezBreaking24 |

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर सियासी माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने सोमवार को अपने गठबंधन का पहला औपचारिक ऐलान करते हुए “मिशन बिहार” का आगाज कर दिया।

इस ऐलान के तहत पहले चरण में 16 मंत्रियों को चुनाव मैदान में उतारने की घोषणा की गई है। इनमें कई बड़े चेहरे शामिल हैं, जिन पर पार्टी को पूर्ण भरोसा है।


गठबंधन की एकजुटता दिखाने की कोशिश

नीतीश कुमार और संजय जायसवाल की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों दलों ने यह स्पष्ट किया कि एनडीए (NDA) इस बार पूरी मजबूती से चुनाव लड़ेगा।
नीतीश कुमार ने कहा, “हमारा लक्ष्य विकास का सिलसिला जारी रखना है, बिहार को नए स्तर पर ले जाना है।”
वहीं बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने साफ कहा कि “अब की बार बिहार में दो तिहाई बहुमत से NDA सरकार बनेगी।”

इस घोषणा के साथ ही बीजेपी और जेडीयू ने विपक्ष को यह संदेश दे दिया कि सीट बंटवारे और उम्मीदवार चयन को लेकर कोई मतभेद नहीं है।


पहले चरण के उम्मीदवारों की सूची में कौन-कौन

पहले चरण की लिस्ट में कुल 16 मंत्रियों के नाम शामिल हैं। इनमें बीजेपी के 9 और जेडीयू के 7 मंत्री शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार जिन चेहरों को टिकट दिया गया है, उनमें शामिल हैं —

  • तारकिशोर प्रसाद (कटिहार)

  • श्रवण कुमार (नालंदा)

  • विजेंद्र यादव (भागलपुर)

  • प्रमोद कुमार (मोतिहारी)

  • जमाखान (गया)

  • अशोक चौधरी (पटना साहिब)

  • रामसेवक सिंह (दरभंगा)

  • सुमन कुमार (मधुबनी)

इन सभी नेताओं को संगठन में प्रभावशाली माना जाता है और पिछले चुनावों में इनकी जीत ने पार्टी को मजबूती दी थी।


‘मिशन बिहार’ का मुख्य फोकस — विकास और स्थिरता

इस बार एनडीए का फोकस सिर्फ चुनावी नारे पर नहीं, बल्कि “काम के आधार पर वोट” की रणनीति पर है।
जेडीयू और बीजेपी दोनों ही दल बिहार के विकास कार्यों — जैसे सड़क, बिजली, सिंचाई, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण — को अपनी उपलब्धि के रूप में जनता के सामने पेश कर रहे हैं।

नीतीश कुमार ने कहा, “हमने बिहार को पिछड़ेपन से बाहर निकालने के लिए जो काम शुरू किया, वो अब फल देने लगा है। आने वाले पांच साल में हर जिले में औद्योगिक क्षेत्र विकसित होगा।”

वहीं बीजेपी नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाएं — जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्जवला, हर घर नल जल और पीएम किसान सम्मान निधि — बिहार में NDA की सबसे बड़ी ताकत हैं।


विपक्ष पर हमला, महागठबंधन को घेरा

इस ऐलान के दौरान बीजेपी और जेडीयू दोनों ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला।
बीजेपी के प्रवक्ता ने कहा कि “महागठबंधन में अब न कोई दिशा है, न नेतृत्व। तेजस्वी यादव केवल घोषणाओं तक सीमित हैं, जबकि जनता काम चाहती है, भाषण नहीं।”

वहीं जेडीयू ने भी कहा कि “हमारे सामने विकास का एजेंडा है, जबकि विपक्ष जाति और नफरत की राजनीति में उलझा है।”

इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और भी गर्म हो गया है।


BJP–JDU का बूथ स्तर तक नेटवर्क एक्टिव

“मिशन बिहार” के तहत एनडीए ने राज्य के हर विधानसभा क्षेत्र में बूथ-स्तर पर संगठन को एक्टिव करने का टारगेट रखा है।
प्रत्येक पंचायत में “एनडीए विकास समिति” बनाई जा रही है, जो स्थानीय मुद्दों पर जनता से सीधे संवाद करेगी।
साथ ही, सोशल मीडिया पर भी “अबकी बार NDA सरकार” का डिजिटल कैंपेन शुरू किया गया है, जिसमें युवा वोटरों को टारगेट किया जा रहा है।


महिला वोटरों पर विशेष फोकस

नीतीश कुमार और बीजेपी दोनों दलों का फोकस इस बार महिला वोट बैंक पर है।
जीविका दीदी योजना, उज्जवला योजना, और बालिका साइकिल योजना जैसे कार्यक्रमों को प्रचार अभियान का अहम हिस्सा बनाया गया है।
पार्टी का मानना है कि बिहार की महिला मतदाता, खासकर ग्रामीण इलाकों में, निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।


युवा और रोजगार को लेकर घोषणा जल्द

बीजेपी-जेडीयू गठबंधन ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में एक विशेष “युवा संकल्प पत्र” जारी किया जाएगा, जिसमें रोजगार और उद्यमिता से जुड़ी योजनाओं की घोषणा होगी।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह घोषणा नवंबर के पहले हफ्ते में पटना के गांधी मैदान में एक बड़ी रैली के दौरान की जाएगी।


राजनीतिक विश्लेषकों की राय

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि 16 मंत्रियों को पहले चरण में उतारना बीजेपी-जेडीयू की रणनीति का हिस्सा है।
इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश बढ़ता है और विरोधियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनता है।
विश्लेषकों का कहना है कि नीतीश कुमार और बीजेपी दोनों जानते हैं कि बिहार में मुकाबला कड़ा है, इसलिए पहले से मजबूत चेहरों को मैदान में उतारना जरूरी था।


वोटर क्या सोच रहे हैं?

ग्रामीण इलाकों में लोगों की राय मिली-जुली है।
कुछ लोग विकास कार्यों से खुश हैं, तो कुछ को बेरोजगारी और महंगाई की चिंता है।
हालांकि, एक बात साफ दिख रही है — इस बार बिहार का चुनाव “कथनी और करनी” दोनों पर होगा।


निष्कर्ष: NDA ने दी विपक्ष को सीधी चुनौती

पहले चरण के उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही NDA ने यह साफ कर दिया है कि वह हर स्तर पर तैयार है।
जहां बीजेपी संगठनात्मक मजबूती पर भरोसा कर रही है, वहीं जेडीयू नीतीश कुमार के नेतृत्व और विकास के एजेंडे को जनता के बीच ले जा रही है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष इस चुनौती का जवाब कैसे देता है।
लेकिन इतना तय है — “मिशन बिहार 2025” की लड़ाई अब सिर्फ सत्ता की नहीं, भरोसे और काम की भी है।

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