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बुधवार, 22 अक्टूबर 2025

तेजस्वी यादव का चुनावी वादा – जीविका दीदियों को मिलेगी स्थायी नौकरी और ₹30,000 वेतन

 तेजस्वी यादव का बड़ा ऐलान: जीविका दीदियों को स्थायी नौकरी और ₹30,000 वेतन — बिहार चुनाव में नया गेमचेंजर?

 मधेपुरा, 22 अक्टूबर 2025 | ✍️रिपोर्ट: कृष्ण कुमार | TezBreaking24 |

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सियासी गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है। इसी बीच विपक्ष के नेता और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख तेजस्वी यादव ने एक बड़ा चुनावी दांव खेला है। उन्होंने ऐलान किया है कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो ‘जीविका दीदियों’ को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाएगा और हर महीने ₹30,000 का वेतन दिया जाएगा।

तेजस्वी का यह बयान चुनावी राजनीति में नया मोड़ ला सकता है, क्योंकि बिहार में करीब 1 करोड़ से ज्यादा महिलाएं जीविका परियोजना से जुड़ी हुई हैं। यह वही महिलाएं हैं जिन्होंने आत्मनिर्भर बिहार के सपने को जमीनी स्तर पर उतारा है।

क्या है जीविका योजना?

“जीविका” योजना बिहार सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। यह योजना 2006 में विश्व बैंक के सहयोग से शुरू हुई थी। आज राज्य के लगभग हर ब्लॉक में महिलाओं के स्वयं सहायता समूह (SHG) सक्रिय हैं, जिन्हें “जीविका दीदी” कहा जाता है।

ये महिलाएं बैंकों से लोन लेकर छोटे-मोटे व्यवसाय चलाती हैं — जैसे सिलाई, खेती, दुग्ध उत्पादन, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण आदि।
परंतु, वर्षों से ये दीदियां मानदेय और अनुबंध आधारित रोजगार पर काम कर रही हैं। इस वजह से इन्हें न तो पेंशन मिलती है, न नौकरी की सुरक्षा।


तेजस्वी यादव का वादा क्यों खास है?

तेजस्वी यादव का यह वादा दो कारणों से खास माना जा रहा है:

  1. महिला वोट बैंक पर सीधी पकड़:
    बिहार में 2020 के चुनाव में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक रही थी। ऐसे में महिला समूहों को स्थायी नौकरी देने का वादा सीधा चुनावी असर डाल सकता है।

  2. रोजगार पर राजनीतिक फोकस:
    तेजस्वी लगातार बेरोजगारी और युवाओं की नौकरी को मुद्दा बना रहे हैं। जीविका दीदियों को स्थायी नौकरी देना इस नैरेटिव को और मजबूत करेगा।

तेजस्वी ने अपने भाषण में कहा —

“बिहार की दीदियां गांव-गांव में परिवर्तन की मिसाल हैं। हम उन्हें सिर्फ काम करने वाली नहीं, राज्य की विकास नायिका बनाना चाहते हैं। सत्ता में आने पर हर जीविका दीदी को सम्मान और स्थायी पहचान मिलेगी।”


सरकार पर तेजस्वी का सीधा हमला

तेजस्वी ने मुख्यमंत्री नितीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने जीविका दीदियों के साथ अन्याय किया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि

“आज तक दीदियों को सिर्फ वादे मिले, उनका हक नहीं। अब वक्त है उन्हें सम्मानजनक वेतन देने का।”

तेजस्वी ने यह भी कहा कि RJD की सरकार आने पर “महिला सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा” को तीन मुख्य स्तंभ बनाए जाएंगे।


एनडीए का पलटवार

जैसे ही यह घोषणा सामने आई, एनडीए (BJP-JDU गठबंधन) ने तेजस्वी के बयान को “चुनावी जुमला” बताया।
जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा,

“तेजस्वी यादव को पहले यह बताना चाहिए कि जब उनके पिता मुख्यमंत्री थे, तब महिलाओं के लिए उन्होंने क्या किया? आज जो वादे कर रहे हैं, उसका वित्तीय स्रोत कहां से लाएंगे?”

वहीं, भाजपा नेताओं का कहना है कि तेजस्वी का वादा “लोकलुभावन” है और इससे राज्य पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा।


महिलाओं की प्रतिक्रिया

जीविका समूहों से जुड़ी महिलाओं में इस घोषणा को लेकर उत्साह देखा गया।
पटना जिले की एक दीदी, रीता देवी ने कहा —

“अगर सच में हमें स्थायी नौकरी मिल जाए तो यह हमारी ज़िंदगी बदल देगा। हम वर्षों से मेहनत कर रहे हैं, अब पहचान भी मिलनी चाहिए।”

वहीं, दरभंगा की सरिता झा ने कहा कि यह वादा भरोसेमंद लगता है क्योंकि तेजस्वी ने युवाओं के रोजगार पर पहले भी बात की थी।


विश्लेषण: चुनावी रणनीति का असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम तेजस्वी यादव की “सोच-समझी रणनीति” का हिस्सा है।
राजनीतिक विश्लेषक प्रवीण झा के अनुसार,

“बिहार में महिला सशक्तिकरण के नाम पर जीविका एक सफल मॉडल है। यदि तेजस्वी इस वर्ग को साथ जोड़ लेते हैं, तो RJD को ग्रामीण वोटों में बड़ा फायदा हो सकता है।”

2020 के चुनाव में भी तेजस्वी ने बेरोजगारी का मुद्दा उठाकर युवाओं के बीच मजबूत पकड़ बनाई थी।
अब वे महिलाओं को लक्षित कर रहे हैं, जिससे महागठबंधन के लिए ग्रामीण इलाकों में वोट बैंक मजबूत हो सकता है।


चुनावी गणित पर संभावित असर

  • बिहार में लगभग 60 लाख सक्रिय जीविका सदस्य हैं।

  • इनमें से 80% महिलाएं ग्रामीण पृष्ठभूमि की हैं, जो हर पंचायत में सक्रिय हैं।

  • इनका सीधा संबंध लगभग 2.5 करोड़ परिवारों से है।

ऐसे में अगर इनमें से आधी महिलाएं भी RJD के पक्ष में रुझान दिखाती हैं, तो चुनावी परिणामों में भारी बदलाव संभव है।


सरकार के लिए आर्थिक चुनौती

अगर इस वादे को अमल में लाया गया, तो राज्य सरकार पर करीब ₹18,000 करोड़ से ₹20,000 करोड़ का सालाना बोझ पड़ेगा।
इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि बिना ठोस आर्थिक योजना के यह वादा व्यवहारिक नहीं होगा।

फिर भी, चुनावी दृष्टि से यह कदम तेजस्वी के लिए “बड़ा मास्टरस्ट्रोक” साबित हो सकता है।


भविष्य की रणनीति क्या होगी?

सूत्रों के मुताबिक, RJD जल्द ही “महिला सम्मान रथ यात्रा” शुरू करने की तैयारी में है, जिसके जरिए यह संदेश हर जिले में पहुंचाया जाएगा कि “दीदियों की सरकार आएगी तो सम्मान और वेतन दोनों मिलेगा।”

वहीं एनडीए इस वादे का जवाब देने के लिए महिला सशक्तिकरण की अपनी योजनाओं — “मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना” और “लड़कियों की शिक्षा सब्सिडी” — को प्रमुखता से सामने ला रहा है।


निष्कर्ष

तेजस्वी यादव का “जीविका दीदियों” को स्थायी नौकरी देने का वादा बिहार की राजनीति में नया एजेंडा सेट कर चुका है।
यह न केवल महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की बात करता है, बल्कि रोजगार और सम्मान के सवाल को भी केंद्र में लाता है।

अब देखना यह होगा कि जनता इसे चुनावी वादा समझती है या भरोसे का अवसर।



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