पनप रही है आपराधिक मानसिकता — मधेपुरा के गम्हरिया प्रखंड में बिगड़ता युवा भविष्य
मधेपुरा (गम्हरिया) – कभी अपनी सादगी और संस्कारों के लिए पहचाना जाने वाला गम्हरिया प्रखंड आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ 18 से 25 वर्ष की उम्र के युवा धीरे-धीरे गलत राह पर बढ़ते जा रहे हैं। नशे की गिरफ्त, गलत संगत, बेरोजगारी और पारिवारिक लापरवाही ने इस नई पीढ़ी को अपराध की दलदल में धकेल दिया है। सवाल उठता है — आखिर ज़िम्मेदार कौन?
युवा जो कल समाज का आधार थे, आज बन रहे हैं समाज की चिंता
गम्हरिया के गाँवों की गलियों में अब खेल-कूद या पढ़ाई की चर्चाएँ नहीं, बल्कि नशे और झगड़ों की बातें सुनी जाती हैं।
18 से 25 की उम्र, जो देश और समाज के निर्माण की उम्र होती है, वहीं अब कई युवा स्मैक, कोडीन युक्त कफ सिरप, नींद की गोलियों जैसे नशे की लत में फंस चुके हैं।
धीरे-धीरे यह लत उन्हें अपराध की ओर धकेल रही है — छोटी-मोटी चोरी, लूट, झगड़े और रंगदारी जैसे अपराध अब आम बात बनती जा रही है।
कारण सिर्फ एक नहीं – पूरा समाज जिम्मेदार
इस स्थिति के पीछे कई परतें हैं, और हर परत में एक गहरी सच्चाई छिपी है।
1. बेरोजगारी – युवा हाथ खाली और मन बेचैन
गम्हरिया प्रखंड में शिक्षा पूरी करने के बाद युवाओं को रोजगार के अवसर नहीं मिलते।
कई युवा काम की तलाश में भटकते हैं, पर जब मेहनत का फल नहीं मिलता, तो मन भटक जाता है।
इन्हीं खाली दिमागों में नशा और अपराध का बीज बोया जा रहा है।
2. माता-पिता की अनदेखी – “मेरा बेटा तो ठीक है” की भूल
रात देर तक बाहर रहना, पैसे की अचानक मांग बढ़ना, मोबाइल पर गलत संगत में रहना — ये सब संकेत हैं, लेकिन माता-पिता इसे “किशोरावस्था का स्वभाव” मानकर छोड़ देते हैं।
इसी लापरवाही से बच्चा धीरे-धीरे गहराई में चला जाता है।
3. नशे की खुलेआम बिक्री – कानून की आँखों के सामने अपराध
सबसे चिंताजनक बात यह है कि नशे के पदार्थ अब खुलेआम बिक रहे हैं।
कफ सिरप, टैबलेट्स और ड्रग्स कुछ रुपयों में हर गली-कूचे में उपलब्ध हैं।
प्रशासन की मौजूदगी के बावजूद इन पर रोक नहीं लग रही।
सवाल उठता है — जो लोग यह ज़हर बेच रहे हैं, क्या उन्होंने कभी सोचा कि इसका असर उनके अपने बच्चों पर भी पड़ सकता है?
4. संगत का असर – गलत साथ, गलत रास्ता
किशोरावस्था में इंसान का मन जल्दी प्रभावित होता है।
कुछ “दोस्तों” के बहकावे में युवा नशे का शिकार हो जाते हैं।
शुरुआत “मज़े के लिए” होती है, और धीरे-धीरे वही मज़ा ज़रूरत बन जाता है, फिर लत और आखिरकार अपराध।
अगर आज नहीं संभाले, तो कल बहुत देर हो जाएगी
अब समय है कि समाज इस समस्या को सिर्फ “दूसरे के घर की बात” मानना बंद करे।
आज अगर किसी और का बेटा बिगड़ रहा है, तो कल वही लड़का हमारे घर का माहौल खराब करेगा।
अपराध की आग जब लगती है, तो वह सिर्फ एक परिवार नहीं, पूरे समाज को जला देती है।
समाज और प्रशासन दोनों को जागना होगा
गम्हरिया जैसे क्षेत्रों में पुलिस को नशे के कारोबार पर सख्त कार्रवाई करनी होगी।
जो मेडिकल स्टोर या व्यक्ति कोडीन युक्त सिरप या प्रतिबंधित दवाएं बेच रहे हैं, उन पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।
इसके साथ ही पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाना जरूरी है — ताकि माता-पिता, शिक्षक और समाज मिलकर इस समस्या को जड़ से खत्म कर सकें।
युवाओं को दिशा देने की ज़रूरत है, डर दिखाने की नहीं
हर नशे में फंसे युवा के अंदर एक “बदलने की चाह” ज़रूर होती है, बस उसे रास्ता दिखाने की जरूरत है।
यदि सरकार और समाज मिलकर उन्हें स्किल डेवलपमेंट, खेल, शिक्षा और रोजगार के अवसर देंगे, तो वही युवा अपराध से नहीं, सम्मान से जीवन जीने का रास्ता चुनेंगे।
नशे का जाल सिर्फ शरीर नहीं, आत्मा को भी खोखला करता है
नशा शुरुआत में सुकून देता है, पर धीरे-धीरे वह आत्मा को मार देता है।
जिस युवक के माता-पिता ने उसकी परवरिश में सब कुछ दिया, वही बेटा अब घर का चैन लूट रहा है।
नशे की गिरफ्त से बाहर निकलना आसान नहीं, लेकिन असंभव भी नहीं — जरूरत है सामूहिक प्रयास और सख्त नियंत्रण की।
निष्कर्ष – अब भी वक्त है
गम्हरिया के युवा आज जिस मोड़ पर हैं, वहाँ से या तो वे अपना भविष्य बना सकते हैं या बर्बाद कर सकते हैं।
समाज, प्रशासन और माता-पिता अगर मिलकर अभी कदम उठाएँ, तो आने वाले सालों में गम्हरिया फिर से वही बनेगा — जहाँ से संस्कार और शिक्षा की खुशबू आती थी।
👉 संपादकीय संदेश:
“अगर आज हमने अपने बच्चों को बचाने के लिए आवाज़ नहीं उठाई,
तो कल हमें अपराध से बचाने के लिए दीवारें भी कम पड़ जाएंगी।”
🗣️ अब आपकी बारी है बोलने की!
गम्हरिया के युवाओं को सही रास्ता दिखाने के लिए समाज की एकजुटता जरूरी है।
अगर आप भी मानते हैं कि नशा सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, पूरे समाज को बर्बाद करता है —
👉 तो अपनी राय नीचे कमेंट करें।
👉 शेयर करें ताकि हर माता-पिता और युवा तक ये सच्चाई पहुँचे।
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ham sabko is disha me thosh kadam uthane ki jarurat hai
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