राहुल गांधी को ‘जननायक’ कहने पर बिहार की राजनीति में बवाल — चुनाव से पहले गरमाई सियासत
पटना, 28 अक्टूबर 2025:
✍️रिपोर्ट: कृष्ण कुमार | TezBreaking24 |
क्या है मामला?
कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक सभा के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने राहुल गांधी को “जननायक” के रूप में संबोधित किया। उनका कहना था कि राहुल गांधी ने किसानों, मजदूरों, युवाओं और आम जनता के अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाई है, इसलिए वे “जननायक” की उपाधि के पात्र हैं।
कांग्रेस ने इस उपाधि को कर्पूरी ठाकुर की विरासत से जोड़ा, जिन्हें बिहार का असली “जननायक” कहा जाता है। यही बात विपक्ष के लिए चुभ गई। भाजपा और जदयू नेताओं ने इसे “राजनीतिक स्टंट” बताया और कहा कि “जननायक” जैसी उपाधि जनता के दिल से निकलती है, न कि पार्टी घोषणा से।
बीजेपी और एनडीए की प्रतिक्रिया
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा —
“जननायक वो होता है जिसे जनता अपने दिल से अपनाए, न कि जिसे पार्टी कार्यकर्ता मंच से घोषित कर दें। कर्पूरी ठाकुर जैसे नेता अपने संघर्ष से जननायक बने, राहुल गांधी को यह दर्जा सोशल मीडिया से नहीं मिलेगा।”
एनडीए के दूसरे नेता, जदयू प्रवक्ता निखिल आनंद ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल गांधी को ‘जननायक’ कहना बिहार के असली जननायकों का अपमान है। उन्होंने कहा कि जो नेता अपनी पार्टी में भी स्थिर नहीं रह पाते, वो जनता के नेता कैसे बन सकते हैं?
कांग्रेस का पलटवार
कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए पलटवार किया। पार्टी प्रवक्ता अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा —
“राहुल गांधी ने किसानों की आवाज उठाई, बेरोजगार युवाओं के लिए संघर्ष किया और महिला आरक्षण बिल के समर्थन में देशभर में रैलियां कीं। जनता उन्हें जननायक कह रही है, पार्टी ने केवल जनता की भावना को शब्द दिया है।”
कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि भाजपा को राहुल गांधी से डर है, इसलिए हर छोटे कदम पर राजनीति करती है। बिहार चुनाव नजदीक आने के कारण यह बयानबाजी और तेज हो गई है।
जनता की राय – सोशल मीडिया पर बहस
सोशल मीडिया पर इस विषय ने जबरदस्त बहस छेड़ दी है। ट्विटर (अब X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #जननायक_राहुल_गांधी और #कर्पूरी_ठाकुर जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
जहां कांग्रेस समर्थक राहुल गांधी को “जननायक” कहकर समर्थन दे रहे हैं, वहीं भाजपा समर्थक इसे “नकली प्रचार” बता रहे हैं।
कुछ लोगों का मानना है कि बिहार जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में “जननायक” शब्द की अपनी भावनात्मक ताकत है, इसलिए इस शब्द का इस्तेमाल सोच-समझकर किया जाना चाहिए था।
कर्पूरी ठाकुर की विरासत और विवाद की जड़
कर्पूरी ठाकुर को बिहार का “जननायक” कहा जाता है क्योंकि उन्होंने गरीबों, पिछड़ों और वंचितों की आवाज को विधानसभा तक पहुंचाया।
उनकी सादगी, निस्वार्थ राजनीति और जनता के बीच मजबूत पकड़ ने उन्हें लोगों के दिल में बसाया।
जब कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी को उसी शब्द से नवाजा, तो राजनीतिक विरोधियों ने इसे कर्पूरी ठाकुर की विरासत को “हड़पने” की कोशिश बताया।
भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस ने बिहार की भावनाओं से खिलवाड़ किया है, जबकि कांग्रेस का दावा है कि राहुल गांधी का उद्देश्य किसी की विरासत छीनना नहीं बल्कि “जनता की सेवा” की उसी परंपरा को आगे बढ़ाना है।
चुनाव समीकरण पर असर
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 अपने निर्णायक मोड़ पर है। पहले चरण के नामांकन जल्द शुरू होने वाले हैं। ऐसे में राहुल गांधी को “जननायक” कहना केवल एक उपाधि नहीं, बल्कि एक राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
कांग्रेस और महागठबंधन (RJD, CPI-ML, और अन्य दलों) का प्रयास है कि राहुल गांधी की छवि को “लोकप्रिय नेता” के रूप में स्थापित किया जाए, ताकि युवाओं और ग्रामीण मतदाताओं में एक नया विश्वास पैदा हो।
वहीं, भाजपा और एनडीए इस बयान को पकड़कर कांग्रेस पर “भावनात्मक राजनीति” करने का आरोप लगा रहे हैं। यह बयानबाजी चुनाव प्रचार में केंद्र बिंदु बन गई है।
प्रियंका गांधी का एंट्री प्लान
सूत्रों के मुताबिक, प्रियंका गांधी जल्द ही बिहार में प्रचार की कमान संभालने वाली हैं।
कांग्रेस की योजना है कि राहुल गांधी की “जननायक यात्रा” को अगले हफ्ते भागलपुर, दरभंगा और मुजफ्फरपुर तक ले जाया जाएगा।
प्रियंका गांधी भी रैली में शामिल होकर महिलाओं और युवाओं से सीधे संवाद करेंगी। इससे कांग्रेस को उम्मीद है कि राज्य में उसकी पकड़ मजबूत होगी और गठबंधन के लिए माहौल बनेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार में “जननायक” शब्द का उपयोग बहुत संवेदनशील मामला है।
डॉ. संजय झा, पटना यूनिवर्सिटी के राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर का कहना है:
“कर्पूरी ठाकुर जैसे नेताओं की पहचान मेहनत और संघर्ष से बनी थी। राहुल गांधी को जननायक कहना एक राजनीतिक प्रयास हो सकता है, लेकिन जनता इसे स्वीकार करेगी या नहीं, यह चुनाव के नतीजे बताएंगे।”
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि कांग्रेस इस विवाद के माध्यम से मीडिया और जनता का ध्यान अपनी ओर खींचने में सफल हुई है।
भले ही यह विवाद आलोचना के केंद्र में हो, पर चर्चा राहुल गांधी पर ही घूम रही है — और यही कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा भी है।
बिहार के युवा मतदाता क्या सोचते हैं
पटना, दरभंगा, भागलपुर और मधेपुरा जैसे जिलों में युवाओं से बातचीत में दो तरह की राय सामने आई।
कुछ युवाओं का कहना है कि राहुल गांधी ने बेरोजगारी और शिक्षा पर खुलकर बात की है, इसलिए उन्हें “जननायक” कहना गलत नहीं।
वहीं कुछ अन्य युवाओं का कहना है कि उपाधि देने से पहले नेता को खुद जनता के बीच लंबे समय तक काम करके दिखाना चाहिए।
एक छात्र नेता ने कहा —
“राहुल गांधी अगर बिहार में किसानों, युवाओं और छोटे कारोबारियों के लिए ठोस काम करते हैं, तो जनता खुद उन्हें जननायक कहेगी, किसी पद से नहीं।”
क्यों ट्रेंड कर रहा है ‘जननायक’ शब्द
“जननायक राहुल गांधी”, “बिहार चुनाव 2025”, “कर्पूरी ठाकुर विरासत विवाद”, और “कांग्रेस बनाम भाजपा बिहार” जैसे कीवर्ड्स इन दिनों सबसे ज्यादा सर्च किए जा रहे हैं।
इस विवाद ने चुनावी माहौल में नया मोड़ ला दिया है, जिससे सोशल मीडिया पर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।
निष्कर्ष
राहुल गांधी को “जननायक” कहने की शुरुआत भले ही कांग्रेस ने की हो, लेकिन इसने बिहार की राजनीति में बड़ा तूफान ला दिया है।
एक ओर कांग्रेस इसे जनता की भावना बता रही है, वहीं भाजपा इसे राजनीतिक नाटक कह रही है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में जनता इस उपाधि को कितनी स्वीकार करती है।
क्या राहुल गांधी सच में बिहार के लोगों के “जननायक” बन पाएंगे या यह शब्द सिर्फ चुनावी रणनीति तक सीमित रह जाएगा — इसका जवाब तो विधानसभा चुनाव 2025 ही देगा।
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