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रविवार, 16 नवंबर 2025

Middle Class India & Credit Score | सच जिसकी कोई बात नहीं करता ||

 मिडिल क्लास का दर्द: क्या क्रेडिट स्कोर ही इंसान की जिंदगी तय करेगा?

✍️लेखक कृष्ण कुमार | TezBreaking24 |

आज मैं एक ऐसे मुद्दे पर बात करने जा रहा हूँ, जिस पर न कोई न्यूज चैनल खुलकर बात करता है और न ही कोई नेता या जनप्रतिनिधि इसे उठाना चाहते हैं। यह मुद्दा है हमारे देश की मिडिल क्लास की कहानी, जो हर दिन अपने परिवार की खुशहाली और बच्चों की पढ़ाई के लिए जद्दोजहद कर रही है।

यह कहानी हर घर की है। हर गली में आप ऐसे परिवार देख सकते हैं, जो जूझ रहे हैं लेकिन किसी से कुछ कह नहीं पा रहे।


मिडिल क्लास की असली लड़ाई

अगर आपके पास सरकारी नौकरी नहीं है, प्राइवेट नौकरी नहीं है, या आप बड़े शहरों में जाकर काम नहीं कर सकते, तो आपके पास जीवन यापन के सिर्फ कुछ ही विकल्प बचते हैं:

  1. किसी न किसी जुगाड़ से घर चलाना

  2. कोई छोटा व्यवसाय शुरू करने की कोशिश करना

लेकिन आज के समय में खेती भी आमदनी का भरोसेमंद स्रोत नहीं है। खाद और बीज महंगे हैं। मौसम कभी भी फसल बर्बाद कर सकता है। ऐसे में किसान और आम आदमी दोनों ही अपनी मजबूरी के कारण सिर्फ जीविका चलाते हैं।

मिडिल क्लास माता-पिता बच्चों को बेहतर शिक्षा और बेहतर जीवन देना चाहते हैं। लेकिन जब घर की आमदनी सीमित होती है, तो यह सपना दूर सा लगता है।


अच्छा जीवन, अच्छा बिजनेस और बैंक लोन

आज के समय में अच्छी आमदनी के लिए सबसे जरूरी है अच्छा बिजनेस
अच्छा बिजनेस शुरू करने के लिए चाहिए अच्छा निवेश
अच्छा निवेश के लिए चाहिए बैंक लोन

लेकिन क्या लोन लेना इतना आसान है?

जब आप बैंक जाते हैं, तो सबसे पहले आपका क्रेडिट स्कोर देखा जाता है।

  • अगर आपका स्कोर 800 या 750 से कम है

  • अगर कभी किसी कारण से EMI लेट हुई है

तो बैंक आपका लोन तुरंत नहीं देगा।

यानी, एक आम आदमी जो मेहनत करके अपने परिवार का पालन-पोषण करता है, उसे भी क्रेडिट स्कोर के आधार पर रोक दिया जाता है।


क्रेडिट स्कोर: क्या यह सिर्फ मिडिल क्लास के लिए है?

सोचिए:

  • क्या क्रेडिट स्कोर यह तय करता है कि किसी इंसान को जीने का हक है या नहीं?

  • क्या यह इंसान की मजबूरी और परिस्थितियों को समझता है?

कभी आपने सोचा है कि जिसने EMI समय पर नहीं दी, उसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं?

  • बीमारी

  • परिवार में आपात स्थिति

  • व्यवसाय में घाटा

  • या नौकरी छूट जाना

इन सबको कोई नहीं देखता। केवल एक नंबर है – क्रेडिट स्कोर।


नेता, अधिकारी और अपराधी – उनके लिए नियम अलग क्यों?

हम अपने नेताओं को चुनते हैं।
वे पांच साल में कई फैसले लेते हैं, कभी-कभी उनका काम जनता के लिए नहीं होता।
लेकिन उनका क्रेडिट स्कोर कभी खराब नहीं होता।

वहीं, आम आदमी की छोटी सी गलती उसे जीवनभर के लिए प्रभावित कर देती है।

एक अपराधी बार-बार अपराध करे, जेल जाए, बाहर आए और फिर अपराध करे…
उसका रास्ता हमेशा खुला रहता है।

एक आतंकी समर्पण करे, उसे नया जीवन मिल जाता है।

लेकिन एक ईमानदार मिडिल क्लास आदमी, जिसने कभी कोई अपराध नहीं किया, केवल अपने हालात के कारण अगर EMI लेट कर देता है, तो उसका क्रेडिट स्कोर खराब हो जाता है।

क्या यही न्याय है?


क्यों क्रेडिट स्कोर ने इंसान की काबिलियत तय करनी शुरू कर दी है?

क्रेडिट स्कोर को देखकर तय किया जाता है कि:

  • आप बिजनेस कर पाएंगे या नहीं

  • आप अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पाएंगे या नहीं

  • आप घर बना पाएंगे या नहीं

लेकिन क्या स्कोर इंसान की मेहनत, ईमानदारी और संघर्ष को दर्शाता है? बिल्कुल नहीं।

मिडिल क्लास हमेशा बीच में फंसा रहता है:

  • न अमीर की तरह शक्ति

  • न गरीब की तरह योजनाएँ

  • बस रोज़मर्रा की जिंदगी की जद्दोजहद


क्रेडिट स्कोर और समाज में असमानता

  • नेताओं और अधिकारियों पर कोई क्रेडिट स्कोर का असर नहीं

  • अपराधियों और अपराध में लिप्त लोगों को नई जिंदगी मिल सकती है

  • वकील और जज अपने काम के बावजूद बच जाते हैं

लेकिन आम आदमी जो सिर्फ अपने परिवार के लिए जी रहा है, वही लगातार दबता है।

यही असली मिडिल क्लास का दर्द है।


समाधान की दिशा

क्रेडिट स्कोर होना जरूरी है, लेकिन इसे समान और इंसाफपूर्ण बनाना जरूरी है।

  • जो नेता या अधिकारी जनता के लिए काम नहीं करता, उसका स्कोर घटे

  • जो अपराधी सुधार करता है, उसके लिए रास्ता खुले

  • जो आम आदमी अपनी मजबूरी के कारण असमय भुगतान नहीं कर पाता, उसे जीवन जीने का हक मिले

तभी समाज और न्याय व्यवस्था सच्चाई के करीब पहुंचेगी।


निष्कर्ष: मिडिल क्लास की आवाज़ उठाने का वक्त

मिडिल क्लास केवल मेहनत से अपने परिवार को चलाता है।
लेकिन क्रेडिट स्कोर के दबाव में उसकी जिंदगी सीमित हो जाती है।
इसलिए जरूरी है कि नीति-makers और सिस्टम बदलें

इंसान की हक़ीकत और परिस्थितियों को समझें, सिर्फ एक नंबर के आधार पर नहीं।

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