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शनिवार, 20 दिसंबर 2025

बिहार में ठंड का कहर: 20 दिसंबर को स्कूल बंद, घना कोहरा | Bihar Latest News

 बिहार में ठंड का कहर: 20 दिसंबर को स्कूल बंद, घना कोहरा और प्रशासन अलर्ट मोड में

✍️लेखक कृष्ण कुमार | TezBreaking24 |

पटना | 20 दिसंबर 2025

बिहार इस समय सर्दी के उस दौर से गुजर रहा है, जब ठंड सिर्फ मौसम नहीं रहती, बल्कि आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का सबसे बड़ा संघर्ष बन जाती है। 20 दिसंबर 2025 की सुबह जैसे ही हुई, पूरे राज्य पर कोहरे की मोटी चादर छा गई। सड़कों पर दृश्यता इतनी कम थी कि कुछ मीटर आगे देख पाना भी मुश्किल हो गया।

बिहार की ये सर्दी डराने वाली है!

पटना से लेकर सीमांचल तक, उत्तर बिहार से लेकर दक्षिण बिहार तक, हर जगह एक ही तस्वीर देखने को मिली—ठंडी हवाएं, कांपते लोग, जलते अलाव और धीमी रफ्तार में चलता जनजीवन।


 सुबह की शुरुआत कोहरे और सन्नाटे के साथ

सुबह करीब 6 बजे पटना की सड़कों पर जो सन्नाटा पसरा था, वह आम दिनों से बिल्कुल अलग था। दफ्तर जाने वाले लोग समय से पहले घर से निकल पड़े, लेकिन कोहरे ने उनकी रफ्तार थाम ली। बाइक सवार हेलमेट के शीशे साफ करते दिखे, कार चालक फॉग लाइट जलाकर धीरे-धीरे आगे बढ़ते नजर आए।

गांवों में हालात और भी मुश्किल रहे। खेतों की तरफ जाने वाले किसान देर तक अलाव के पास बैठे रहे। मजदूरों के सामने रोज़ी और सेहत, दोनों की चिंता खड़ी हो गई।


 ठंड ने गरीब और मेहनतकश तबके को सबसे ज्यादा मारा

बिहार में ठंड का असर हर वर्ग पर पड़ता है, लेकिन इसका सबसे गहरा असर गरीब, मजदूर और बेघर लोगों पर दिख रहा है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और बाजारों के आसपास अलाव के सहारे लोग रात काटने को मजबूर हैं।

कई जगहों पर लोगों का कहना है कि ठंड इस बार पहले से ज्यादा चुभ रही है। ठंडी हवा सीधे शरीर को बेधती हुई महसूस हो रही है। जिनके पास गर्म कपड़े नहीं हैं, उनके लिए यह मौसम किसी परीक्षा से कम नहीं।


 बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल बंद, अभिभावकों को राहत

ठंड और कोहरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियातन बड़ा फैसला लिया। कई जिलों में कक्षा 8 तक के स्कूलों को बंद रखने का आदेश जारी किया गया है। कुछ जगहों पर स्कूलों का समय बदल दिया गया है, ताकि बच्चे सुबह के खतरनाक कोहरे में बाहर न निकलें।

अभिभावकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि बच्चों की सेहत सबसे जरूरी है। कोहरे में स्कूल भेजना खतरे से खाली नहीं है।


 बुजुर्गों और बच्चों पर सबसे ज्यादा असर

डॉक्टरों के मुताबिक, इस समय सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से बीमार लोगों को है। अस्पतालों में सर्दी, खांसी, बुखार और सांस की समस्या लेकर आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है।

सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी क्लीनिकों में भी मरीजों की भीड़ देखी जा रही है। डॉक्टरों ने लोगों को सुबह-शाम ठंड से बचने और गर्म कपड़े पहनने की सलाह दी है।


 प्रशासन अलर्ट मोड में, दिए गए सख्त निर्देश

राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने ठंड को लेकर पूरी सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। सभी जिलों के अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि ठंड से किसी भी तरह की जनहानि न हो।

नगर निगम और पंचायत स्तर पर अलाव जलाने की व्यवस्था की जा रही है। रैन बसेरों में बेघर लोगों के लिए कंबल, गर्म कपड़े और भोजन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि अगर कहीं लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी।


अलाव बना सहारा, सड़कों पर दिखी जमीनी हकीकत

शहरों की चमक-दमक के बीच सड़कों के किनारे जलते अलाव बिहार की जमीनी सच्चाई बयां कर रहे हैं। कहीं मजदूर हाथ सेंकते दिखे, तो कहीं रिक्शा चालक अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए।

यह ठंड सिर्फ मौसम की खबर नहीं है, बल्कि उन लोगों की कहानी भी है, जिनके पास ठंड से बचने के साधन सीमित हैं।


 कोहरे का असर यातायात पर, ट्रेनों की रफ्तार थमी

घने कोहरे ने रेल और सड़क यातायात को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। कई ट्रेनें अपने निर्धारित समय से देरी से चल रही हैं। यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर ठंड में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।

हाईवे पर वाहनों की रफ्तार धीमी है। कई जगहों पर छोटे हादसों की खबरें भी सामने आई हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि जरूरी होने पर ही यात्रा करें।


 मौसम विभाग की चेतावनी, राहत अभी दूर

मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 से 72 घंटे तक बिहार में ठंड और कोहरे से राहत मिलने की उम्मीद कम है। कुछ जिलों में कोल्ड डे की स्थिति बनी रह सकती है।

न्यूनतम तापमान में और गिरावट दर्ज की जा सकती है। सुबह और देर रात ठंड का असर सबसे ज्यादा रहेगा।


आम लोगों की आवाज

पटना के एक मजदूर रामविलास कहते हैं,
“साहब, ठंड बहुत तेज है। काम पर जाना भी जरूरी है और ठंड से बचना भी मुश्किल।”

वहीं एक अभिभावक का कहना है,
“स्कूल बंद होने से थोड़ी राहत मिली है। बच्चों की जान से बढ़कर कुछ नहीं।”


निष्कर्ष

20 दिसंबर 2025 को बिहार ठंड और कोहरे की गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है। यह सिर्फ मौसम की खबर नहीं, बल्कि आम आदमी की जिंदगी से जुड़ा सवाल है। प्रशासन की तैयारी और सतर्कता जरूरी है, लेकिन जमीनी स्तर पर मदद उतनी ही अहम है।

आने वाले कुछ दिन बिहार के लिए अहम हैं। जब तक मौसम नहीं बदलता, तब तक ठंड के साथ संघर्ष जारी रहेगा।



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